Book Updates
Vishnu Sahasranama in daily life
May 12, 2026 · 6 min read
यह पुस्तक किसी विद्वान की मेज़ पर नहीं, एक साधारण गृहस्थ के हृदय में जन्मी है।
महाभारत के अनुशासन पर्व में एक अद्भुत प्रसंग आता है। शर-शय्या पर लेटे भीष्म पितामह से युधिष्ठिर पूछते हैं — “इस संसार में एक देव कौन है? एक परम आश्रय क्या है? किसकी स्तुति और पूजा से मनुष्य कल्याण पाता है? और सबसे बड़ा धर्म कौन-सा है?” उत्तर में भीष्म जो सुनाते हैं, वही श्री विष्णुसहस्रनाम है — भगवान विष्णु के एक हज़ार नाम।
पर ये केवल नाम नहीं हैं। हर नाम एक खिड़की है, जिससे हम उस परम सत्ता को — और सच कहें तो अपने ही जीवन को — एक नए कोण से देख पाते हैं। कोई नाम कहता है कि वे सर्वव्यापी हैं, तो हमें अकेलेपन से मुक्ति मिलती है। कोई नाम कहता है कि वे साक्षी हैं, तो हमें अपने आचरण की याद आती है। कोई नाम कहता है कि वे धैर्य के स्वामी हैं, तो हमारा उतावलापन शांत होता है।
इस पुस्तक का उद्देश्य अनुवाद भर नहीं है। उद्देश्य यह दिखाना है कि रसोई में, दफ़्तर में, दुकान पर, रिश्तों की खींचतान में, क्रोध के क्षण में, भय की रात में — हर जगह ये नाम हमारे काम आते हैं। अर्थ लिखते समय मैंने आदि शंकराचार्य की भाष्य-परंपरा, वेद-पुराणों की दृष्टि और संतों की सीख का सहारा लिया है, पर भाषा वैसी रखी है जैसे कोई बड़ा भाई पास बैठकर समझा रहा हो।
एक निवेदन — इसे उपन्यास की तरह एक साँस में न पढ़ें। रोज़ एक-दो अध्याय पढ़ें, दिन भर उस नाम को साथ रखें, और शाम को देखें कि उसने आपके व्यवहार में क्या बदला। यही इस पाठ की असली पूजा है।
Reader Letter
Get a free chapter — and new-release alerts
One email a month. No noise. Unsubscribe anytime.